मुजफ्फरपुर।
कहते हैं मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है। पंख से
कुछ नहीं होता, हौसलों में उड़ान होती है। तुर्की प्रखंड के प्राथमिक
विद्यालय परिसर में अवस्थित सदियों पुराने मृतप्राय हो चुके अनजान वृक्ष को
टिश्यू कल्चर पद्धति से पौधे के रूप में विकसित करके इस कहावत को चरितार्थ
कर दिखाया है मुजफ्फरपुर बोटेनिकल रिसर्च इनस्टीच्यूट, भटौलिया के
संस्थापक अविनाश कुमार ने। मृतप्राय हो चुके इस पौधे को तैयार करने में
पंद्रह सप्ताह का समय लगा।
अफ्रीकी देशों में इसे कल्प-वृक्ष नाम से जानते हैं
बिहार प्रदेश में इस प्रकार का अनाम पेड़ का सिर्फ एक वृक्ष मुजफ्फरपुर के तुर्की में पाया गया है जो भी मृतप्राय था। इस प्रकार के पौधे मूलत: अफ्रीका के किंगडम-घ्लांति, ऑर्डर-माल्वेलाश, फैमिली-माल्वेशी और जीनस-एडेंसोनिया सहित आठ स्पेसिज में ऐसे पेड़ देखने को मिलता है। इन देशों में इस पेड़ को कल्प-वृक्ष के रूप में जाना जाता है।
पत्ता और छाल भी है उपयोगी: इस अनाम पेड़ के पत्ते का उपयोग सब्जी बनाने एवं दवा के रूप में किया जाता हैं। इसके पत्ते को पिसकर पीने से पेट संबंधी कई बीमारियां जड़-मूल से खत्म हो जाती है। इसमें विटामिन-सी और कैल्सियम प्रचुर मात्रा में मिलता है। छाल एवं पत्ता मवेशी का दूध बढ़ाने में काफी लाभदायक है। अफ्रीका के लोग सुबह में इस पेड़ का दर्शन होना शुभ मानते है।
पौधे के साथ अविनाश कुमार
अविनाश कुमार द्वारा मृतप्राय हो चुकी अनाम पेड़ को टिश्यू कल्चर विधि से पौधा के रूप में विकसित किए जाने की गूंज लोकसभा में गूंज चुका है। वैशाली के सांसद डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ने लोकसभा के तारांकित प्रश्नों के जरिये उक्त बोटेनिकल इनस्टीच्यूट को विकसित करने एवं केन्द्र सरकार द्वारा अधिकृत किए जाने की मांग कर चुके हैं।
मुजफ्फरपुर बोटेनिकल रिसर्च इंस्टीच्यूट, भटौलिया के संस्थापक अविनाश कुमार द्वारा इस पौधे को टिश्यू कल्चर विधि से विकसित करने से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सराहना कर चुके है और बिहार दिवस के मौके पर 21 मार्च 2012 को पटना गांधी मैदान में नीतीश ने अविनाश को सम्मानित किया।
पेड़ के पत्ते, तना एवं जड़ के भाग को टिश्यू कल्चर विधि से ट्रीटमेंट कर ग्रोथ-हार्मोन्स के साथ बंद टेस्ट ट्यूब के छह बोतलों में अलग-अलग डाला गया। दो सप्ताह बाद दो बोतलों में डाले गए हार्मोन्स डेड हो गए। जबकि चार बोतलों से पांचवे सप्ताह कल्चर निकला। फिर उसे सातवें सप्ताह नई बोतल में डाला गया और पंद्रह सप्ताह बाद नया पौधा तैयार हो गया।
पटना. राज्य के एक करोड़ 37 लाख बीपीएल परिवार, लगभग 25 लाख अंत्योदय परिवार और एक करोड़ 07 लाख एपीएल परिवारों को सही मात्रा में खाद्यान्न मिल सके इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है। डोर स्टेप डिलीवरी में पायलट योजना के तहत सभी 38 जिलों के एक-एक प्रखंड में इसकी शुरुआत की जाएगी। ये बातें बुधवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और बिहार स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा जन वितरण प्रणाली के खाद्यान्नों की डोर स्टेप डिलीवरी में आने वाली समस्याओं व उनके निराकरण के लिए आयोजित कार्यशाला में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्याम रजक ने कही। उन्होंने कहा कि योजना के तहत जिन ट्रकों का इस्तेमाल किया जाएगा उनमें जीपीएस प्रणाली का होना अनिवार्य होगा। सभी ट्रक भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से पंचायत के गोदाम तक खाद्यान्न पहुंचाएंगे। इसके बाद उस पंचायत के सभी जन वितरण प्रणाली विक्रेता अपने खाद्यान्न का उठाव कर सकेंगे। इसके अलावे जब खाद्यान्न गोदामों में पहुंच जाएगा तो लाउडस्पीकर, एसएमएस अलर्ट योजना के तहत लाभुकों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
श्याम रजक ने बताया कि विभाग ने 15 जुलाई तक 15 लाख मिट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। इससे पहले 22 लाख मैट्रिक टन धान की खरीदारी हो चुकी है।
डोर स्टेप डिलीवरी योजना लागू करने के लिए पूर्व से प्रयास जारी हैं। इसके लिए जिला आपूर्ति पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और राज्य के 307 गोदामों में लैपटॉप प्रदान किए गए हैं। कम्प्यूटर ऑपरेटर को भी संविदा पर बहाल किया जा रहा है। इसके अलावे सभी जिलाधिकारियों से पंचायत स्तर के गोदामों तक पहुंचने के लिए रूटचार्ट उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
अफ्रीकी देशों में इसे कल्प-वृक्ष नाम से जानते हैं
बिहार प्रदेश में इस प्रकार का अनाम पेड़ का सिर्फ एक वृक्ष मुजफ्फरपुर के तुर्की में पाया गया है जो भी मृतप्राय था। इस प्रकार के पौधे मूलत: अफ्रीका के किंगडम-घ्लांति, ऑर्डर-माल्वेलाश, फैमिली-माल्वेशी और जीनस-एडेंसोनिया सहित आठ स्पेसिज में ऐसे पेड़ देखने को मिलता है। इन देशों में इस पेड़ को कल्प-वृक्ष के रूप में जाना जाता है।
पत्ता और छाल भी है उपयोगी: इस अनाम पेड़ के पत्ते का उपयोग सब्जी बनाने एवं दवा के रूप में किया जाता हैं। इसके पत्ते को पिसकर पीने से पेट संबंधी कई बीमारियां जड़-मूल से खत्म हो जाती है। इसमें विटामिन-सी और कैल्सियम प्रचुर मात्रा में मिलता है। छाल एवं पत्ता मवेशी का दूध बढ़ाने में काफी लाभदायक है। अफ्रीका के लोग सुबह में इस पेड़ का दर्शन होना शुभ मानते है।
पौधे के साथ अविनाश कुमार
अविनाश कुमार द्वारा मृतप्राय हो चुकी अनाम पेड़ को टिश्यू कल्चर विधि से पौधा के रूप में विकसित किए जाने की गूंज लोकसभा में गूंज चुका है। वैशाली के सांसद डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह ने लोकसभा के तारांकित प्रश्नों के जरिये उक्त बोटेनिकल इनस्टीच्यूट को विकसित करने एवं केन्द्र सरकार द्वारा अधिकृत किए जाने की मांग कर चुके हैं।
मुजफ्फरपुर बोटेनिकल रिसर्च इंस्टीच्यूट, भटौलिया के संस्थापक अविनाश कुमार द्वारा इस पौधे को टिश्यू कल्चर विधि से विकसित करने से प्रभावित होकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सराहना कर चुके है और बिहार दिवस के मौके पर 21 मार्च 2012 को पटना गांधी मैदान में नीतीश ने अविनाश को सम्मानित किया।
पेड़ के पत्ते, तना एवं जड़ के भाग को टिश्यू कल्चर विधि से ट्रीटमेंट कर ग्रोथ-हार्मोन्स के साथ बंद टेस्ट ट्यूब के छह बोतलों में अलग-अलग डाला गया। दो सप्ताह बाद दो बोतलों में डाले गए हार्मोन्स डेड हो गए। जबकि चार बोतलों से पांचवे सप्ताह कल्चर निकला। फिर उसे सातवें सप्ताह नई बोतल में डाला गया और पंद्रह सप्ताह बाद नया पौधा तैयार हो गया।
पटना. राज्य के एक करोड़ 37 लाख बीपीएल परिवार, लगभग 25 लाख अंत्योदय परिवार और एक करोड़ 07 लाख एपीएल परिवारों को सही मात्रा में खाद्यान्न मिल सके इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है। डोर स्टेप डिलीवरी में पायलट योजना के तहत सभी 38 जिलों के एक-एक प्रखंड में इसकी शुरुआत की जाएगी। ये बातें बुधवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग और बिहार स्टेट फूड एंड सिविल सप्लाइज कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा जन वितरण प्रणाली के खाद्यान्नों की डोर स्टेप डिलीवरी में आने वाली समस्याओं व उनके निराकरण के लिए आयोजित कार्यशाला में खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्याम रजक ने कही। उन्होंने कहा कि योजना के तहत जिन ट्रकों का इस्तेमाल किया जाएगा उनमें जीपीएस प्रणाली का होना अनिवार्य होगा। सभी ट्रक भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से पंचायत के गोदाम तक खाद्यान्न पहुंचाएंगे। इसके बाद उस पंचायत के सभी जन वितरण प्रणाली विक्रेता अपने खाद्यान्न का उठाव कर सकेंगे। इसके अलावे जब खाद्यान्न गोदामों में पहुंच जाएगा तो लाउडस्पीकर, एसएमएस अलर्ट योजना के तहत लाभुकों को इसकी जानकारी दी जाएगी।
श्याम रजक ने बताया कि विभाग ने 15 जुलाई तक 15 लाख मिट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। इससे पहले 22 लाख मैट्रिक टन धान की खरीदारी हो चुकी है।
डोर स्टेप डिलीवरी योजना लागू करने के लिए पूर्व से प्रयास जारी हैं। इसके लिए जिला आपूर्ति पदाधिकारी, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी और राज्य के 307 गोदामों में लैपटॉप प्रदान किए गए हैं। कम्प्यूटर ऑपरेटर को भी संविदा पर बहाल किया जा रहा है। इसके अलावे सभी जिलाधिकारियों से पंचायत स्तर के गोदामों तक पहुंचने के लिए रूटचार्ट उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
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