Tuesday, 31 July 2012

उप मुख्यमंत्री ने लिया कचरा मुक्त बिहार बनाने का संकल्प


पटना। बिहार का कचरा प्रबंधन असंतोषजनक है। कचरा प्रबंधन के लिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। लोगों की मानसिकता बदलकर ही शहर को साफ सुथरा बनाया जा सकता है। यह बात गुरुवार को उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इन्वायरमेंट प्रोटेक्शन ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट(ईपीटीआरआई), हैदराबाद के तत्वावधान में आयोजित नगरी ठोस कचना व प्लास्टिक कचरा प्रबंधन विषय पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
इस मौके पर उन्होंने राज्य को साफ-सुथरा और कचरा मुक्त बनाने का संकल्प लिया और कहा कि कचरा प्रबंधन सिर्फ नगर निकायों के दम पर संभव नहीं है। कार्यक्रम में वन एवं पर्यावरण विभाग के प्रधान सचिव दीपक कुमार सिंह, बीएसपीसीबी अध्यक्ष डॉक्टर सुभाष चन्द्र सिंह, ईपीटीआरआई केपी प्रसाद राव, डॉक्टर आशा पांडेय आदि मौजूद थे।
एसएचजी की सहायता
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि कचरा को डोर-टू-डोर जमा करने के लिए स्वयं सहायता समूह की मदद ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि दुकानों और बहु मंजिली इमारतों को कूड़ा-कचरा डोर-टू-डोर सर्विस को देने या फिर कूड़ेदान में फेंकने के लिए बाध्य करना होगा।
कचरा प्रबंधन निजी क्षेत्र की कंपनियों को
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी शहरों के कचरा प्रबंधन की जिम्मेवारी निजी क्षेत्र की कंपनियों को सौंपी जाएगी। पटना की साफ-सफाई और बैरियाचक में कचरा डिस्पोजल का जिम्मा ‘जिंदल’ नामक कंपनी को सौंपी गई है। इसके अलावा आरा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, बिहार शरीफ, फुलवारी शरीफ और दानापुर शहरों के साफ-सफाई के लिए प्राइवेट कंपनियों से करार किया गया है।
कोई नहीं होगा बेरोजगार 

उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने नगर निकाय कर्मियों को गारंटी दिया कि साफ-सफाई क्षेत्र में निजी कंपनियों के आने से उनकी नौकरी समाह्रश्वत नहीं होगी। निकायों पर कचरा प्रबंधन का अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा। उन्होंने कहा कि कचरा प्रबंधन कंपनियों से कचरा-छाटने के लिए रैग पिकर्स को
जोड़ा जाएगा।
भारतीय तकनीक की जरूरत 

सुशील कुमार मोदी ने कहा कि भारत में धूल ज्यादा है। यहां विदेशों से आयातित सफाई मशीनें कारगर साबित नहीं हुई है। उन्होंने सफाई व्यवस्था के लिए भारतीय परिस्थिति के अनुसार मशीनों को विकसित करने पर बल दिया।

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